ई-वेस्ट से निर्मित “पुनर्नवा हस्त” बना आकर्षण का केंद्र — पर्यावरण संरक्षण, तकनीक और कला का अनूठा संगम




जयपुर | 

जयपुर के प्रसिद्ध कलाकार एवं ई-वेस्ट स्कल्पचर आर्टिस्ट मुकेश कुमार ज्वाला द्वारा निर्मित विशाल इंस्टालेशन “पुनर्नवा हस्त” इन दिनों शहर में विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खुली हथेली (ओपन पाम) के स्वरूप में तैयार यह भव्य कलाकृति पर्यावरण संरक्षण, आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के अद्भुत समन्वय को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

यह इंस्टालेशन पूरी तरह ई-वेस्ट सामग्री से तैयार किया गया है, जिसमें पुराने कंप्यूटर, मदरबोर्ड्स, वायरिंग, एसएमपीएस, एक्सपायर्ड एटीएम एवं डेबिट कार्ड्स सहित विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक अवयवों का उपयोग किया गया है। लगभग 11 फीट ऊँची तथा पेडस्टल सहित करीब 15 फीट ऊँची इस विशाल कलाकृति को कलाकार ने मात्र एक माह पंद्रह दिनों में तैयार किया।

“पुनर्नवा हस्त” को जयपुर के टोंक रोड स्थित नेहरू पैलेस परिसर में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के प्रशासनिक कार्यालय के सामने स्थापित किया गया है, जहाँ यह आमजन, कला प्रेमियों एवं तकनीक से जुड़े लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। राहगीर और दर्शक इस अनूठी कला को देखकर न केवल प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि ई-वेस्ट और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी हो रहे हैं।

कलाकार मुकेश कुमार ज्वाला ने बताया कि इस इंस्टालेशन की संरचना तैयार करने के लिए सबसे पहले लोहे के सरियों से मजबूत आर्मेचर बनाया गया। इसके बाद विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक अवयवों को अत्यंत सूक्ष्मता और कलात्मकता के साथ संयोजित कर मानव हस्त का स्वरूप दिया गया। इस पूरी संरचना में तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है।






“पुनर्नवा हस्त” की खुली हथेली विश्वास, सुरक्षा, सहयोग, संभावनाओं और सकारात्मक भविष्य का प्रतीक है। हथेली की उंगलियों पर बनाए गए फिंगरप्रिंट आधुनिक बायोमेट्रिक पहचान और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को दर्शाते हैं, जबकि हथेली के भीतर उकेरे गए पत्तियों के आकार पर्यावरण संरक्षण, हरित चेतना और प्राकृतिक संतुलन का संदेश देते हैं। वहीं मदरबोर्ड्स और वायरिंग को इस प्रकार संयोजित किया गया है कि पूरी संरचना एक जीवंत डिजिटल नेटवर्क का अनुभव कराती है, जो आधुनिक भारत की तकनीकी प्रगति और नवाचार को प्रतिबिंबित करती है।

यह कलाकृति ई-वेस्ट जैसी तेजी से बढ़ती वैश्विक पर्यावरणीय चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करती है। “पुनर्नवा हस्त” यह संदेश देती है कि जिसे सामान्यतः अनुपयोगी कचरा समझकर फेंक दिया जाता है, वही रचनात्मक सोच, कला और नवाचार के माध्यम से समाज के लिए प्रेरणा और सतत भविष्य का आधार बन सकता है।

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के सहयोग से स्थापित इस ई-वेस्ट स्कल्पचर पहल को बैंक प्रशासन द्वारा भी सराहा गया है। बैंक के अनुसार यह कलाकृति पर्यावरणीय जिम्मेदारी, तकनीकी नवाचार और सामाजिक जागरूकता का सशक्त प्रतीक है, जो समाज को सतत विकास और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में प्रेरित करती है।

उल्लेखनीय है कि कलाकार मुकेश कुमार ज्वाला लंबे समय से ई-वेस्ट आधारित सार्वजनिक कलाकृतियों पर कार्य कर रहे हैं। उनकी कला कृतियाँ नई दिल्ली, मुंबई, ग्वालियर, रायपुर, भोपाल, कानपुर और जयपुर सहित देश के कई प्रमुख शहरों एवं संस्थानों में स्थापित हैं। इससे पूर्व उनकी चर्चित कलाकृतियाँ “मानस्वी”, “तपस्वी”, “मातृका” एवं “पुनर्नवा” भी व्यापक सराहना प्राप्त कर चुकी हैं।

कलाकार का मानना है कि कला केवल सौंदर्य प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता का प्रभावी साधन भी है। “पुनर्नवा हस्त” इसी सोच का सशक्त उदाहरण है, जो तकनीक और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए एक जागरूक, टिकाऊ और प्रेरणादायक भविष्य की परिकल्पना प्रस्तुत करती है।


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