जयपुर। राजधानी जयपुर के टोंक रोड स्थित प्रतिष्ठित श्री पिंजरापोल गौशाला एक बार फिर गंभीर आरोपों और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में आ गई है। महालेखाकार (AG) राजस्थान की अनुपालना लेखापरीक्षा रिपोर्ट में गौशाला प्रबंधन पर करीब सवा दो करोड़ रुपये के कथित अनुदान घोटाले का खुलासा होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता मुनीश कुमार शर्मा ने राज्य के मुख्य सचिव, गोपालन विभाग एवं देवस्थान विभाग के आयुक्त को विधिक नोटिस जारी कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर पूरे मामले को जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से राजस्थान उच्च न्यायालय में उठाया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच गौशाला सहायता अनुदान योजना के तहत कुल 2 करोड़ 21 लाख 55 हजार 820 रुपये की राशि कथित रूप से नियमों के विपरीत प्राप्त की गई। आरोप है कि अनुदान प्राप्त करने के लिए प्रपत्र-5 और ऑनलाइन पोर्टल पर पशुओं के रिकॉर्ड में भारी हेरफेर किया गया।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह सामने आया कि रिकॉर्ड में 1307 मृत गौवंशों के टैग शामिल कर उन्हें जीवित दर्शाया गया और उनके नाम पर अनुदान प्राप्त किया गया। इसके अलावा 4858 पशुओं के टैग ऐसे पाए गए जो “भारत पशुधन एप” पर पंजीकृत ही नहीं थे। वहीं 93 पशुओं के टैगों की पुनरावृत्ति कर एक ही पशु को कई बार दर्शाने का भी आरोप लगाया गया है।
नियमों के अनुसार गौशालाओं को अनुदान केवल उन्हीं पशुओं पर मिलता है जो निर्धारित अवधि तक गौशाला में मौजूद रहते हैं, लेकिन आरोप है कि यहां उन पशुओं पर भी अनुदान उठा लिया गया जो मौके पर मौजूद ही नहीं थे। विधिक नोटिस में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए भौतिक सत्यापन में मिलीभगत की आशंका जताई गई है।
मामले में गौसेवा की आड़ में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के भी आरोप लगाए गए हैं। नोटिस में कहा गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए हरे और सूखे चारे को दोबारा बेचने का कारोबार किया जा रहा है, जिसके लिए लगभग 30 लाख रुपये का ठेका दिए जाने की बात कही गई है।
इसके अलावा दानदाताओं के सहयोग से बने ‘सुरभि सदन’ और ‘सत्संग भवन’ का उपयोग धार्मिक आयोजनों के बजाय विवाह समारोह, निजी पार्टियों और विद्यालय संचालन जैसे व्यावसायिक कार्यों में किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
विज्ञप्ति में यह भी दावा किया गया कि गौशाला में पशुओं को दिया जाने वाला चारा पास के नाले से आने वाले प्रदूषित एवं रासायनिक अपशिष्ट युक्त पानी से उगाया जा रहा है, जिससे पशुओं और मानव स्वास्थ्य दोनों पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
अधिवक्ता मुनीश कुमार शर्मा ने सरकार से पिछले दस वर्षों का स्वतंत्र विशेष ऑडिट कराने, पशुओं की वास्तविक संख्या की पुनः जांच कराने, प्रदूषित जल से चारा उगाने पर रोक लगाने और अवैध निर्माण हटाने की मांग की है। साथ ही वर्तमान कार्यकारिणी को भंग कर सरकारी प्रशासक नियुक्त करने की भी मांग उठाई गई है।
उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समयावधि में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई और अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगी, तो पूरे मामले को राजस्थान उच्च न्यायालय में जनहित याचिका के माध्यम से उठाया

