जयपुर, 15 जून। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गरीब कल्याण और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के विजन को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार 1 जुलाई 2026 से देशभर में ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जीरामजी) लागू करने जा रही है। यह योजना मनरेगा का स्थान लेगी और ग्रामीण रोजगार, आजीविका सुरक्षा तथा बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति देगी।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने इस मिशन हेतु 95,692 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है, जो ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के इतिहास का सबसे बड़ा आवंटन माना जा रहा है। राजस्थान को केंद्र की ओर से 7,581 करोड़ रुपये से अधिक का अंतरिम आवंटन मिला है, जबकि राज्य सरकार 4,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त उपलब्ध कराएगी। इस प्रकार प्रदेश में योजना के लिए 11,581 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध होगी।
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र परिवारों को अब 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी। साथ ही श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान 15 दिन के बजाय साप्ताहिक आधार पर डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा।
योजना में समय पर रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता तथा मजदूरी भुगतान में देरी होने पर क्षतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है। विभिन्न विभागों की योजनाओं के संसाधनों का समन्वय कर दोहराव रोकने और गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा ताकि कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार इसके लाभ से वंचित न रहे। मौजूदा मनरेगा जॉब कार्ड धारकों के ई-केवाईसी पूर्ण होने की स्थिति में उनके कार्ड नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे।
