जयपुर, 12 जून। भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर को अधिक कुशल, किफायती और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निरंतर सुधार और आधुनिक प्रबंधन तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। यह बात CII द्वारा जयपुर में आयोजित लॉजिस्टिक्स कॉन्क्लेव के प्रथम संस्करण के उद्घाटन सत्र में CII–इंस्टीट्यूट ऑफ लॉजिस्टिक्स के प्रिंसिपल काउंसलर ने कही।
उन्होंने कहा कि भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को समय, लागत, सुरक्षा और सामान की हैंडलिंग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसका असर ग्राहक सेवा, मुनाफे और व्यवसायिक क्षमता पर पड़ता है। इन चुनौतियों के समाधान के लिए CII का "लॉजिस्टिक्स काइज़ेन एक्टिवेशन" कार्यक्रम जापानी काइज़ेन पद्धति पर आधारित है, जो स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लगातार सुधार पर केंद्रित है।
कॉन्क्लेव में ने कहा कि लॉजिस्टिक्स काइज़ेन को अपनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। सप्लाई चेन, वेयरहाउस और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को अधिक कुशल बनाकर कार्बन फुटप्रिंट और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में "लीन" और "ग्रीन" एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं।
CII राजस्थान के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड ने बताया कि कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में व्यावहारिक सुधारों को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में प्रोसेस स्टैंडर्डाइजेशन, अक्षमताओं की पहचान, परफॉर्मेंस मेट्रिक्स और लॉजिस्टिक्स काइज़ेन फ्रेमवर्क जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वहीं ने लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस में व्यवस्थित और निरंतर सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे लागत में कमी, दक्षता में वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होती है।
कॉन्क्लेव के दौरान CII जयपुर और CII इंस्टीट्यूट ऑफ लॉजिस्टिक्स ने राजस्थान में 90 दिवसीय "एक्टिवेटिंग लॉजिस्टिक्स काइज़ेन" कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा भी की। इसके तहत उद्योगों को डायग्नोस्टिक्स, गाइडेड इम्प्लीमेंटेशन और मापनीय सुधारों की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।
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कार्यक्रम में सप्लाई चेन, बेस्ट प्रैक्टिसेज, समस्या समाधान और आधुनिक लॉजिस्टिक्स तकनीकों पर चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। समापन सत्र में ने कहा कि उद्योग विशेषज्ञों ने लागत और समय में कमी लाने तथा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अपनाए जा रहे सफल मॉडलों की जानकारी साझा की।
कॉन्क्लेव में वेयरहाउसिंग, सोलर, मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और ऑटो-कंपोनेंट सेक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
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