जयपुर, जनवरी 2026: ब्लूवन इंक द्वारा प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क 2026 के तीसरे दिन प्रकाशन, साहित्य और रचनात्मकता के सत्रों की एक रोचक श्रृंखला देखने को मिली। क्षेत्रीय भाषाओं को केंद्र में लाने की अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, इस दिन का विशेष फोकस मराठी प्रकाशन पर रहा। महोत्सव के तीसरे दिन लेखकों, एजेंटों और प्रकाशन उद्योग के विशेषज्ञों ने मंच की गरिमा बढ़ाई, जहाँ पुस्तकों और कहानी कहने की बदलती दुनिया पर सार्थक संवाद और विचार-विमर्श हुआ।
दिन की शुरुआत लाइव लाइन्स: इंडिया–यू.के. पब्लिशिंग फेलोज़ कनेक्ट सत्र से हुई, जिसमें हैरिएट हिर्शमैन और रूबी हेम्ब्रम ने हेमा सिंह रैंस के साथ संवाद किया। इस सत्र में भारत और यू.के. में स्वतंत्र प्रकाशन के अनुभवों पर चर्चा हुई और इंडिया–यू.के. पब्लिशिंग फेलोशिप कार्यक्रम की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों को प्रस्तुत किया गया। यह कार्यक्रम स्वतंत्र प्रकाशकों को पेशेवर प्रशिक्षण, नेटवर्किंग और जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल व लंदन बुक फेयर जैसे मंचों में भागीदारी के माध्यम से सहयोग प्रदान करता है, जिससे लेखन और अनुवाद के लिए नए बाज़ार और सांस्कृतिक संवाद विकसित हो सकें। रूबी हेम्ब्रम ने अपने प्रकाशन संस्थान आदिवाणी के बारे में बताया, जो आदिवासी इतिहास और मौखिक परंपराओं को किताब की शक्ल में लाने पर केंद्रित है, साथ ही यह भी रेखांकित किया कि अंग्रेज़ी किस तरह हाशिए की आवाज़ों को व्यापक और वैश्विक मंच देती है। वहीं हैरिएट हिर्शमैन ने रचनात्मक स्वतंत्रता और मूल्यों पर आधारित प्रकाशन के लिए स्वतंत्र राह चुनने के अपने अनुभव साझा किए और कहा कि स्वतंत्र प्रकाशन संस्थान अक्सर जोखिम उठाने और प्रयोग करने में अधिक सक्षम होते हैं।
इसके बाद ऑप्टिमिज़्म इन द टाइम्स ऑफ़ चेंज: मैपिंग द फ़्यूचर फ़ॉर बिग पब्लिशर्स सत्र में हार्परकॉलीन्स इंडिया के सीईओ अनंत पद्मनाभन और ई-कॉमर्स व एआई के क्षेत्र मे विशेष दखल रखने वाली श्रेया पुंज ने भारतीय प्रकाशन और पाठकवर्ग के भविष्य पर चर्चा की। संस्कृति, तकनीक और पुस्तकों के आपसी संबंध को रेखांकित करते हुए श्रेया पुंज ने कहा, “पढ़ना कोई नागरिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक लत है,” और आने वाले समय में मौजूद व्यापक संभावनाओं की ओर इशारा किया। अनंत पद्मनाभन ने एआई और इंटरनेट के प्रभाव पर बात करते हुए बताया कि किस तरह टेक्नोलॉजी ने रिटेल, पाइरेसी, परफॉर्मेंस मार्केटिंग और क्यूरेशन को बदला है, और यह भी कहा कि प्रकाशन जगत ने हमेशा तकनीक को अपनाया है। इस अवसर पर उन्होंने हार्परकॉलिन्स की पहल ईयर ऑफ़ रीडिंग फ़ॉर प्लेज़र 2026 का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य देशभर में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
इसके बाद नॉर्दर्न लाइट्स: चिल्ड्रेंस लिटरेचर फ्रॉम नार्वे सत्र में ओलिवर मॉयस्टैड ने ट्रूडा स्प्राइट के साथ संवाद किया। नॉर्ला द्वारा प्रस्तुत इस सत्र में नॉर्वे के बाल साहित्य की खूबियों पर प्रकाश डाला। चर्चा में यह बात भी निकल कर आई कि सरकारी सहयोग किस तरह साहित्य को मजबूत बनाता है, जहाँ राज्य की योजनाओं के तहत बच्चों की पुस्तकों को खरीदकर पुस्तकालयों में वितरित किया जाता है, जिससे पाठकवर्ग और भाषा दोनों को मजबूती मिलती है। कहानी कहने के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करते हुए मॉयस्टैड ने कहा, “अच्छे साहित्य की तरह, जब कोई रचना निजी और ख़ास होती है, तो वह सार्वभौमिक बन जाती है।”
इसके बाद पॉपुलर प्रकाशन के प्रकाशक हर्ष भटकल ने राजनेता अनिश गावंडे के साथ मिलकर प्रकाशन संस्था की 100 वर्ष की विरासत को याद किया। इस संवाद में पॉपुलर प्रकाशन के प्रभाव पर विचार किया गया, जिस पर अनिश गावंडे ने कहा, “पॉपुलर प्रकाशन की कहानी भारत की कहानी है।” दोनों ने विश्व युद्धों, स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल जैसी भारत की अहम ऐतिहासिक घटनाओं पर चर्चा की, जब इस प्रकाशन ने अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए आवाज़ दबाने के प्रयासों का विरोध किया था। आज पॉपुलर प्रकाशन चिकित्सा, आधुनिक समाजशास्त्र और मराठी साहित्य सहित विविध विषयों पर पुस्तकें प्रकाशित करता है। सत्र का समापन नवाचार, इंटरनेट और वाणिज्यिक व कॉर्पोरेट प्रकाशन के उभार पर चर्चा के साथ हुआ।
ऑथर्स एंड एजेंट्स: द डेलिकेट बैलेंस ऑफ़ एक्सपेक्टेशंस सत्र में अक्षिता नंदा, सरन्या सुब्रमणियन और त्रिशा दास ने साहित्यिक एजेंट जयप्रिया वासुदेवन के साथ संवाद किया। इस चर्चा में लेखक की रचनात्मक दृष्टि और प्रकाशक की व्यावसायिक अपेक्षाओं के बीच अक्सर होने वाले टकराव पर बात हुई, और इस संतुलन को साधने में एक अच्छे एजेंट की भूमिका पर विचार किया गया। पैनल ने अस्वीकृति की वास्तविकताओं, धैर्य की आवश्यकता और किसी पुस्तक को अपना स्थान पाने में लगने वाले समय पर भी प्रकाश डाला।
मराठी प्रकाशन जगत के दिग्गज अशुतोष रामगीर, किरण हरिभाऊ कुलकर्णी, रोहन चंपानेकर और विकास परांजपे ने हर्ष भटकल के साथ मिलकर मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने पर चर्चा की। महाराष्ट्र सरकार के मराठी भाषा विभाग द्वारा प्रस्तुत इस सत्र में इस बात पर विचार किया गया कि प्रकाशन जगत और सरकार मिलकर भाषा की विरासत को और अधिक सशक्त व गरिमामय बनाने के लिए क्या कदम उठा सकते हैं। पैनल में मराठी भाषा की विविध धाराओं, उसकी विरासत, परंपरा और भविष्य के प्रकाशन रुझानों पर गहन संवाद हुआ।
दिन 3 का समापन मार्केटिंग राउंडटेबल:द हब एंड द स्पोक्स इन द व्हील सत्र के साथ हुआ। इस सत्र में अजय जैन, अनिरुद्ध चक्रवर्ती, निजेश शाह, रचना कालरा, राहुल दीक्षित और सक्षम गर्ग ने आकृति त्यागी के साथ बातचीत करते हुए आज के समय में पुस्तकों की खोज और उनके वितरण पर चर्चा की।
चर्चा में प्रकाशन क्षेत्र में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया, खासकर शोध, डेटा विश्लेषण और शुरुआती मार्केटिंग ड्राफ्ट तैयार करने में इसकी भूमिका पर। साथ ही यह भी रेखांकित किया गया कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद, बुकस्टोर्स में मानवीय चयन और क्यूरेशन की अहमियत बनी हुई है—विशेषकर नए और पहली बार पढ़ने वाले पाठकों के लिए।
ब्लूवन इंक प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क का चौथा दिन भी बेहद आशाजनक रहने वाला है, जिसमें विविध और रोचक संवादों की श्रृंखला शामिल है। कार्यक्रमों में द फ्रेंच कनेक्शन: स्नैपशॉट्स फ्रॉम द पब्लिशिंग इंडस्ट्री सत्र शामिल है, जिसमें गेल बोहे, मेरी-ऐन लाकोमा और वायोलेन फ़ॉकों, चिंतन गिरीश मोदी के साथ संवाद करेंगे। इसके साथ ही द फ़्यूचर ऑफ़ बुक्स: रीइमैजिनिंग नैरेटिव्स सत्र में डेल्फ़ीन क्लो, जोसेलिन अज़ोरिन-लारा और मायलिस वोतेरैं, स्वाती चोपड़ा के साथ पुस्तकों के भविष्य और बदलते कथानकों पर चर्चा करेंगे। कॉन्ट्रैक्ट्स: रीडिंग द फ़ाइन प्रिंट सत्र में अमृता त्रिपाठी और ध्रुव सिंह, हेमाली सोढ़ी के साथ अनुबंधों की बारीकियों और उनके महत्व पर बातचीत करेंगे। इसके अतिरिक्त ये दिल मांगे मोर: आर्ट एंड एनीमे फ्रॉम जापान सत्र में योशितोकी ओइमा और योशिआकी कोगा, राधिका झा के साथ जापानी कला और एनीमे की दुनिया पर संवाद करेंगे। इस सत्र का दुभाषिया अनुवाद तोमोको किकुची द्वारा किया जाएगा।