जयपुर,2026:जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल के साथ आयोजित हो रहे दक्षिण एशिया के प्रमुख प्रकाशन सम्मेलन ब्लूवन इंक द्वारा प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क के 5वें दिन प्रकाशक, संपादक, फ़ेस्टिवल निदेशक और सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ केंद्र में रहीं।
13वां संस्करण रीडिफ़ाइनिंग बेस्टसेलर्स: व्हाट इज़ सेलिंग इन द इंडियन मार्केट्स सत्र के साथ संपन्न हुआ। इस सत्र में अनिरुद्ध चक्रवर्ती, मिली ऐश्वर्या, सक्षम गर्ग, शैलेश भरतवासी और स्वाति चोपड़ा ने मीता कपूर के साथ संवाद किया और यह समझने का प्रयास किया कि आज के प्रकाशन जगत में बेस्टसेलर कैसे बनते
पैनल में नए लेखकों और स्थापित लेखकों के लिए प्रकाशन रणनीतियों के अंतर, और मार्केटिंग के तरीकों पर चर्चा हुई—सोशल मीडिया में मौजूदगी से लेकर किताबों की दुकानों, रिटेलर्स और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म की भूमिका पर बात हुई, जो किसी किताब को लंबे समय तक पाठकों तक पहुंचाने में सहायक होते हैं। सत्र में पायरेसी, कम संख्या में डिजिटल प्रिंटिंग, क्षेत्रीय और ‘नई हिंदी’ प्रकाशन पर बढ़ते फोकस, और लगातार बदलती ऑनलाइन दुनिया में किताबों की बिक्री से जुड़ी चुनौतियों पर भी बात हुई।
नमिता गोखले द्वारा परिचय कराए गए और तमिलनाडु टेक्स्टबुक एंड एजुकेशनल सर्विसेज़ कॉरपोरेशन द्वारा प्रस्तुत इंडोलॉजी: शेड्स एंड लेयर्स ऑफ़ अ सिविलाइज़ेशन सत्र में विद्वान आर. बालकृष्णन और टी. एस. सरवनन के साथ भारत के सांस्कृतिक इतिहास पर चर्चा हुई। बातचीत में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भारत की विरासत को समझने के लिए भाषा बेहद अहम है, क्योंकि इसमें जीती और हारी गई ऐतिहासिक लड़ाइयों का रिकॉर्ड दर्ज है।
वक्ताओं ने इंडस वैली सिविलाइज़ेशन, संगम साहित्य और द्रविड़ सांस्कृतिक प्रभाव पर चर्चा की। बालकृष्णन ने भारत की तुलना विविधताओं से भरे “वर्षा-वन” से की। उन्होंने बताया कि कैसे इतिहास नामों में स्थिर होकर रह जाता है, जैसे पारसी समुदाय द्वारा लाए गए नाम। उन्होंने तमिलनाडु में मनाए जाने वाले “इंडस पोंगल” के उदाहरण भी साझा किए, जहां पारंपरिक रंगोली में इंडस वैली के प्रतीक दिखाई देते हैं। इस संवाद में इतिहास, भोजन और दर्शन संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सम्मेलन का समापन फ़ेस्टिवल डायरेक्टर्स राउंडटेबल के साथ हुआ, जिसमें अंजनी रायपत, बिस्वदीप चक्रवर्ती, चांदनी चौधरी, जेनेट डीनिफ़, गोविंद डीसी, हन्ना कर्टिस, जीसस रूइज़ मंतिल्ला, मस्तुरा मुहम्मद, जूली फिंच, लॉरा मैनरिंग, लाविनिया फ़्रे और शुभा संजय उर्स ने संजॉय के. रॉय के साथ संवाद किया। इस चर्चा में आज के समय में साहित्यिक फ़ेस्टिवल आयोजित करने की कठिन वास्तविकताओं पर बात की गई। इसमें यह भी देखा गया कि फ़ेस्टिवल किस तरह संस्कृति, राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के संगम का काम करते हैं, और रचनात्मक स्वतंत्रता को प्रयोजकों के साथ ही सरकारी संबंधों तथा स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संवेदनशीलताओं के साथ संतुलित करने की चुनौतियों पर बात हुई।
ब्लूवन इंक प्रस्तुत जयपुर बुकमार्क 2026 के समापन के साथ, अंतिम दिन ने एक बार फिर इस मंच की उस भूमिका को रेखांकित किया, जो इसे वैश्विक प्रकाशन समुदाय के लिए संवाद, सहयोग और साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा देने वाला एक अहम आयोजन बनाती है। यह मंच एक ऐसा अहम मिलन बिंदु है, जो किताबों, विचारों और सांस्कृतिक जुड़ाव के भविष्य को आकार देने का प्रयास करता है।