जयपुर, 06 दिसम्बर।
देश की आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और नागरिक सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गृह रक्षा विभाग का 63वां स्थापना दिवस आज केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थान, गृह रक्षा, जयपुर में पूरे उत्साह और गौरव के साथ मनाया गया। राज्य स्तरीय इस समारोह में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए।
मुख्य अतिथि ने भव्य परेड की सलामी ली
समारोह की मुख्य अतिथि महानिदेशक एवं महासमादेष्टा गृह रक्षा मालिनी अग्रवाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ग्रहण की।
इस अवसर पर प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक द्वारा भारत सरकार के गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, विभागीय मंत्री बाबूलाल खराड़ी, तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा भेजे गए प्रेरक संदेशों का पठन किया गया।
असाधारण सेवा के लिए प्रदान किए गए डीजीसीडी कमेन्डेशन डिस्क
मुख्य अतिथि मालिनी अग्रवाल ने उत्कृष्ट कार्य हेतु कई जाँबाज़ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया।
वर्ष 2024 के लिए भारत सरकार, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा घोषित D.G.C.D कमेन्डेशन डिस्क एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए—
- समादेष्टा स्वाति शर्मा – सिल्वर डिस्क मय प्रशस्ति पत्र
- प्लाटून कमाण्डर सत्यनारायण देवड़ा – ब्रॉन्ज डिस्क मय प्रशस्ति पत्र
- इसके अलावा चार अन्य कर्मचारियों व स्वयंसेवकों को भी ब्रॉन्ज डिस्क प्रदान किए गए।
स्थापना दिवस 2025 पर 21 कार्मिक महानिदेशक प्रशस्ति से सम्मानित
डीजी गृह रक्षा अग्रवाल द्वारा कुल 21 अधिकारियों, कार्मिकों और स्वयंसेवकों को महानिदेशक प्रशस्ति पत्र एवं प्रशस्ति डिस्क से सम्मानित किया गया—
- 03 अधिकारी
- 06 कार्मिक
- 04 स्वयंसेवक – प्रशस्ति डिस्क सहित
- 08 मंत्रालयिक कार्मिक – प्रशस्ति पत्र
राष्ट्रीय स्तर के पदकों की घोषणा — राजस्थान का बढ़ा गौरव
स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा राजस्थान के 09 कार्मिकों को राष्ट्रीय सम्मान हेतु चयनित किया गया। इनमें—
रजत पदक एवं प्रशस्ति पत्र
- समादेष्टा सुमन ढ़ाका
- उप समादेष्टा रामजी लाल
कांस्य पदक एवं प्रशस्ति पत्र
- उप महासमादेष्टा बादोराव मीणा
- उप समादेष्टा धर्मसिंह बाँकावत
- प्रियंका कड़वासरा,
साथ ही 2 स्वयंसेवकों के नाम भी शामिल।
इन राष्ट्रीय पदकों का वितरण आगामी विभागीय समारोहों में किया जाएगा।
राजस्थान गृह रक्षा विभाग का यह स्थापना दिवस समारोह न केवल सेवा-पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है, बल्कि विभागीय कर्मियों के समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और देशसेवा की भावना को भी सम्मानित करता है।




