जोधपुर, 17 दिसंबर।
राजस्थान आवासन मंडल द्वारा विकसित की गई आवासीय कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने आमजन का जीवन कठिन बना दिया है। कॉलोनियों में रहने वाले नागरिक लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इसी के विरोध में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) के बैनर तले महिलाओं ने आवाज बुलंद करते हुए आवासन मंडल के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
एडवा की जिला सचिव इंद्राकुमारी ने बताया कि कुणी–भगतासनी हाउसिंग बोर्ड और विवेक-विहार क्षेत्र में राजस्थान आवासन मंडल ने प्लॉट और फ्लैट तो आवंटित कर दिए, लेकिन वहां रहने योग्य बुनियादी ढांचा विकसित करने की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई गई। फ्लैट कॉलोनियों की सड़कें टूटकर बिखर चुकी हैं, कई स्थानों पर चारदीवारियां ढह चुकी हैं, पार्क उपेक्षा और बदहाली का शिकार हैं। कहीं बिजली की गंभीर समस्या है तो कहीं पेयजल की भारी किल्लत, जिससे आम नागरिकों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एडवा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि जन-सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय का घोर अभाव है। कई कॉलोनियां आज भी ग्राम पंचायत और नगर निगम के क्षेत्राधिकार के बीच उलझी हुई हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर वहां रहने वाले नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। आरोप लगाया गया कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों ने अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते इन कॉलोनियों की जनता को उपेक्षा का शिकार बनाया है और वर्षों से समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है।
इसी कड़ी में एडवा राजस्थान प्रदेश कमेटी सदस्य मीनाक्षी शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं के एक शिष्टमंडल ने राजस्थान आवासन मंडल के उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा। महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही सड़क, पानी, बिजली, पार्क और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो एडवा को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
इस दौरान एडवा कुणी–भगतासनी और विवेक-विहार क्षेत्रीय कमेटियों की पदाधिकारी सुशीला कंवर, नीरू, अनिता, दीपिका वलानी, लविना, सुशीला एवं किरण राठौड़ सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि आवासन मंडल की कॉलोनियों में रहने वाले नागरिक भी सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन के हकदार हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
