जयपुर, 24 दिसंबर।
उपांग कथक नृत्य कला केंद्र, जयपुर द्वारा आयोजित वार्षिक कथक महोत्सव बुधवार को जवाहर कला केंद्र में भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस सांस्कृतिक संध्या में भारतीय शास्त्रीय नृत्य, विशेषकर कथक कला की समृद्ध विरासत को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना “ये गणपति जगवंदन” से हुई। इसके बाद मन्जूश्या दानी एवं नूतन अग्रवाल ने गीत “रहे ना रहे हम” पर मधुर प्रस्तुति दी। कोपल मोहनला ने “शिव–कैलाशों के वासी” पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। वर्धम डोलिया ने “निगाहें मिलाके बदल जाने वाले” और “मोहे रंग दो लाल” ठुमरी पर प्रभावशाली समूह कथक प्रस्तुत किया।
साधना नित्या गुप्ता ने “बरसाने की छोरी” पर मनोहारी नृत्य किया। नवेली वशिष्ठ और प्रस्सति वशिष्ठ ने युगल कथक, जबकि अनाहिका ने एकल कथक प्रस्तुत किया। शिवस्तुति की प्रस्तुति में श्वेता, रोसी और विजयलक्ष्मी ने भावपूर्ण नृत्य किया। “कान्हा” गीत पर डॉ. सीमंतिनी चतुर्वेदी, पूर्णिमा और संगीता ने सशक्त भावनात्मक प्रस्तुति दी।
कथक सीनियर ग्रुप—अवनी, अंजली, कोमल, सलोनी, साक्षी और भव्या—की प्रस्तुति इस महोत्सव का विशेष आकर्षण रही। तिनताल में ग्यारह मात्रा अर्जुन तास भेद पर परिधि, क्रिस्यांत्री, ऋधिमा और काव्यानी ने उत्कृष्ट तकनीकी नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राधारमन शर्मा (पूर्व अध्यक्ष, पिंक सिटी प्रेस क्लब) रहे। उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए शास्त्रीय नृत्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों की आवश्यकता बताई।
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इस भव्य आयोजन के कथक गुरु और आयोजक जय कुमार जांबड़ा रहे, जिनके मार्गदर्शन में उपांग कथक नृत्य कला केंद्र निरंतर कथक कला के प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को शास्त्रीय नृत्य से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
समापन अवसर पर आयोजकों ने सभी कलाकारों, गुरुजनों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।






