जयपुर, 18 जनवरी।
“जिंदगी में पेड़ कोई भी हो सकता है, लेकिन फल तो अपने ही कर्मों का मिलता है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी समता भाव को धारण करता है, वही सच्चा संत और सच्चा श्रावक होता है।”
ये उद्गार अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने रविवार को रामनिवास बाग स्थित यूनियन फुटबॉल क्लब ग्राउंड में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्य श्री ने कहा कि समाज में लोग धनवान को नहीं, बल्कि धर्मात्मा को सम्मान देते हैं। उन्होंने 25 जनवरी से 1 फरवरी तक मानसरोवर स्थित शिप्रा पथ, वीटी रोड पर राजस्थान आवासन मंडल के ग्राउंड में आयोजित होने वाले श्री 1008 चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विधान जीवन के पापों को धोने और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इसमें सहभागिता करने का आह्वान किया।
13 वर्ष बाद होगा चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान, पहली बार विवाह अणुव्रत संस्कार शिविर
इस अवसर पर उपाध्याय पियूष सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म के इतिहास में भगवान महावीर के बाद आचार्य प्रसन्न सागर महाराज पहले ऐसे संत हैं जिन्होंने शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर जी के स्वर्णभद्र कूट पर चातुर्मास किया और 557 दिनों की मौन साधना के साथ सिंहनिष्क्रीडित व्रत किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के संत हैं।
निर्यापक मुनि नवपदम सागर महाराज (पूर्व में जयपुर निवासी पं. दीपचंद छाबड़ा) ने कहा कि आचार्य श्री की तपस्या और साधना का कोई सानी नहीं है। उन्होंने अपने जीवन में अब तक 12 हजार से अधिक उपवास किए हैं। 3 जुलाई से 18 जनवरी तक 200 दिनों में से 145 दिन उपवास में व्यतीत किए गए।
नगर प्रवेश बना ऐतिहासिक
इससे पूर्व आचार्य श्री ससंघ का जनता कॉलोनी जैन मंदिर से बैंड-बाजों के साथ मंगल विहार प्रारंभ हुआ। अग्रवाल कॉलेज से नगर प्रवेश की विशाल शोभायात्रा जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार और चौड़ा रास्ता होते हुए रामनिवास बाग पहुंची, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।
गणमान्यजन रहे उपस्थित
धर्मसभा में विधायक कालीचरण सराफ, आचार्य प्रसन्न सागर महाराज जयपुर प्रवास समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद जैन, महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा, अजमेर नगर निगम के उपमहापौर नीरज जैन, सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। मंच संचालन बा. ब्र. तरुण भैया (इंदौर), कमल बाबू जैन एवं इंदिरा बड़जात्या ने किया। आभार महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने व्यक्त किया।
आगामी कार्यक्रम
प्रवास समिति के अनुसार आचार्य श्री 20 जनवरी को कीर्तिनगर, 21 से 23 जनवरी तक गायत्री नगर महारानी फार्म, 24 जनवरी को मीरामार्ग स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवास करेंगे।
आचार्य श्री ससंघ के सान्निध्य में 25 जनवरी से 1 फरवरी तक मानसरोवर, शिप्रा पथ वीटी रोड पर आठ दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव, विश्व शांति महायज्ञ एवं विवाह अणुव्रत संस्कार शिविर का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें 2552 जोड़े सहभागिता करेंगे।