अमर शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस 21 जनवरी को श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा, शहरभर में 40 से अधिक स्थानों पर कार्यक्रम

 

जयपुर।

अमर शहीद हेमू कालानी का बलिदान दिवस शहर में 21 जनवरी, बुधवार को श्रद्धा, सम्मान और देशभक्ति के भाव के साथ मनाया जाएगा। भारतीय सिंधु सभा एवं विभिन्न पूज्य सिंधी पंचायतों के तत्वावधान में शहर के 40 से अधिक स्थानों पर शहीद हेमू कालानी को स्मरण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाएंगे।

इस अवसर पर पूज्य सिंधी पंचायत, सिंधी कॉलोनी राजापार्क, अमर लाल साहिब मंडल और अमर शहीद हेमू कालानी सेवार्थ समिति के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार सुबह 8:30 बजे सिंधी कॉलोनी, राजापार्क स्थित शहीद हेमू कालानी पार्क में विराट हिंदू सम्मेलन एवं बलिदान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम में श्री अमरापुर दरबार के संत मोनू राम एवं पुरसनाराम साहब मंडल के मुकेश साध शहीद हेमू कालानी की वीरता और बलिदान का गुणगान करेंगे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अशोक शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे।

इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पूज्य सिंधी पंचायत बनीपार्क द्वारा कंवर कानन पार्क में सुबह 9 बजे श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।

पूज्य सिंधी पंचायत दादी का फाटक में सुबह 9:30 बजे पंचायत कार्यालय में देशभक्ति गीतों के साथ कार्यक्रम होगा।

वहीं हीरा पथ, मानसरोवर में सुबह 10:30 बजे बलिदान दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

पूर्व संध्या पर हुए कार्यक्रम

बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर भी शहर में अनेक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत, कुंभा मार्ग, प्रताप नगर में साध्वी तरुणा दीदी द्वारा भजन और देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर शहीद को नमन किया गया। इस दौरान दीपदान का आयोजन भी हुआ।

पूज्य सिंधी पंचायत सेक्टर 61–63, मानसरोवर में भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

इसके साथ ही थड़ी मार्केट स्थित शीशमहल श्री झूलेलाल मंदिर में शहीद हेमू कालानी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया।

अमर शहीद हेमू कालानी का जीवन परिचय

अमर शहीद हेमू कालानी का जन्म 23 मार्च 1923 को अविभाजित भारत के सक्खर (वर्तमान सिंध) में हुआ था। उनके पिता का नाम पेसू मल और माता का नाम जेठी बाई था। बचपन से ही वे निर्भीक, स्वाभिमानी और प्रखर देशभक्त थे। युवावस्था में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी शुरू की।

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सेना की हथियारों से भरी रेलगाड़ी को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई, ताकि अंग्रेजों को हथियारों की आपूर्ति रोकी जा सके। दुर्भाग्यवश वे अंग्रेजों के हाथों पकड़े गए। जेल में उन पर अमानवीय अत्याचार किए गए, लेकिन उन्होंने अपने किसी भी साथी का नाम उजागर नहीं किया।

मात्र 19 वर्ष की आयु में 21 जनवरी 1943 को अंग्रेजों ने उन्हें फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया। हेमू कालानी ने हँसते-हँसते भारत माता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए और अमर शहीद के रूप में इतिहास में सदैव के लिए अमर हो गए।

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