किन्नर अखाड़ा का बड़ा दावा, “किन्नर जिहाद” के नाम पर संगठित नेटवर्क सक्रिय अवैध वसूली, धर्मांतरण और कट्टरता के आरोप, राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा मुद्दा

 


जयपुर, 16 जनवरी।

राजधानी जयपुर में किन्नर अखाड़ा ने किन्नर समाज के भीतर कथित अवैध गतिविधियों और धार्मिक कट्टरता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मानसरोवर स्थित सुमेर पैराडाइज़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास महाराज ने दावा किया कि देशभर में “किन्नर जिहाद” के नाम पर एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो सनातनी किन्नरों के धर्मांतरण, अवैध वसूली और आर्थिक शोषण में लिप्त है।

ऋषि अजय दास महाराज ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में सनातनी किन्नरों पर दबाव बनाकर मुस्लिम रीति-रिवाज अपनाने को मजबूर किया जा रहा है। विरोध करने पर मारपीट, सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक दंड जैसी कार्रवाइयाँ की जाती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जन्म से हिंदू होने के बावजूद कई किन्नरों का अंतिम संस्कार इस्लामिक परंपराओं से किया जा रहा है।



प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी आरोप लगाया गया कि कथित किन्नर गिरोह त्योहारों, शादियों और अन्य शुभ अवसरों पर दबंगई के साथ अवैध वसूली करते हैं। वसूली से प्राप्त धन का उपयोग शराब, मांसाहार, अय्याशी और संदिग्ध गतिविधियों में किया जाता है। अजय दास महाराज के अनुसार, तथाकथित किन्नर सम्मेलनों में 10 से 15 दिनों तक कव्वाली, नाच-गाना, जुआ और शराब पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि इन गतिविधियों पर न तो टैक्स लगाया जाता है और न ही किसी प्रकार की सरकारी निगरानी है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि किन्नर गिरोहों में बांग्लादेशी नागरिकों की घुसपैठ सामने आई है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। ऋषि अजय दास महाराज ने सवाल उठाया कि जब देश की अन्य सामाजिक और धार्मिक संस्थाएँ सरकार को आय-व्यय का पूरा हिसाब देती हैं, तो किन्नर गिरोहों को टैक्स और जांच से छूट क्यों दी जा रही है।



ऋषि अजय दास महाराज ने समाज और सरकार से अपील की कि अवैध गतिविधियों में लिप्त कट्टरपंथी किन्नरों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए और सनातनी किन्नरों को उनका सम्मान, अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता दिलाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में किन्नर वेश में कट्टरपंथी तत्वों की घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बजरंग सेना, हिन्दू वाहिनी सेना, विश्व हिंदू परिषद और मीणा महासंघ सहित कई संगठनों के पदाधिकारी और किन्नर समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने किन्नर अखाड़ा के आरोपों को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की।

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