जयपुर | शनिवार, 10 जनवरी 2026
जयपुर के ऐतिहासिक सवाई मानसिंह स्टेडियम में भारतीय सेना द्वारा आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘शौर्य संध्या’ ने राष्ट्रभक्ति, वीरता और सैन्य परंपराओं का अनुपम संगम प्रस्तुत किया। सप्त शक्ति कमांड के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम सेना दिवस समारोहों की पूर्व संध्या के रूप में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह, आर्मी कमांडर, सप्त शक्ति कमांड ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, वीरगति को प्राप्त सैनिकों के नेक्स्ट ऑफ किन्स (NoKs), पूर्व सैनिक, सिविल प्रशासन के गणमान्य अधिकारी, मीडिया प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने भारतीय सेना के अदम्य साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आर्मी कमांडर के भव्य स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात पैरामोटर डिस्प्ले और प्रतीकात्मक गुब्बारों के विमोचन ने समारोह में उत्साह और उल्लास का संचार किया। इसके बाद प्रदर्शित सेना दिवस कर्टेन रेज़र फ़िल्म ने भारतीय सेना की ऑपरेशनल रेडीनेस, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
अपने प्रेरणादायी संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने सीमाओं की सुरक्षा के प्रति सेना की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय सेना देशवासियों की अपेक्षाओं पर सदैव खरी उतरी है। उन्होंने सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच गहरे भावनात्मक जुड़ाव को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
कार्यक्रम के दौरान भारत की स्वदेशी युद्ध कलाओं — कलरीपायट्टु और मल्लखंब — के सशक्त और ऊर्जावान प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने सेना की शारीरिक दक्षता, अनुशासन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक पेश की।
समारोह का भव्य समापन ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित नाटकीय लाइट एंड साउंड शो के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को युद्धभूमि के सजीव अनुभव से रूबरू कराया। इसके उपरांत आकाश में तिरंगे रंगों से सुसज्जित ड्रोन डिस्प्ले ने पूरे वातावरण को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया।
‘शौर्य संध्या’ भारतीय सेना के साहस, बलिदान और व्यावसायिक उत्कृष्टता को समर्पित एक भव्य श्रद्धांजलि के रूप में उभरकर सामने आई। यह कार्यक्रम सेना और राष्ट्र की जनता के बीच अटूट संबंध को और अधिक सुदृढ़ करता हुआ कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्रसेवा जैसे शाश्वत मूल्यों का सशक्त उत्सव बना।




