जयपुर।
स्टेनी मेमोरियल कॉलेज, जयपुर में संस्कार भारती, जयपुर प्रांत के सौजन्य से संविधान के कला पक्ष विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संस्कार भारती राजस्थान के क्षेत्र प्रमुख अरुण कुमार शर्मा रहे।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान होने के साथ-साथ एक अनुपम कलात्मक कृति भी है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुए मूल संविधान के 22 भाग भारतीय सभ्यता, संस्कृति और मूल्यों से प्रेरित चित्रों से सुसज्जित हैं। संविधान की हस्तलिखित मूल प्रति के प्रत्येक पृष्ठ पर कलात्मक चौखट, सुंदर लेखन और भावनात्मक चित्रांकन इसकी विशिष्ट पहचान है।
उन्होंने बताया कि अंग्रेज़ी हस्तलेखन का कार्य प्रेम बिहारी नारायण रायजादा तथा हिंदी हस्तलेखन वसंत कृष्ण वैद्य द्वारा किया गया, जिन्होंने संविधान को केवल एक दस्तावेज़ नहीं बल्कि भावनात्मक कृति का स्वरूप दिया। वहीं, सुप्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस और राम मनोहर सिन्हा के नेतृत्व में शांतिनिकेतन विश्वभारती के कलाकारों ने संविधान को चित्रों से सजाया, जिसमें राजस्थान के पद्मश्री कृपाल सिंह शेखावत का योगदान भी अविस्मरणीय रहा।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. राधा शर्मा ने कहा कि संविधान में बने चित्रों से प्रबंधन, नेतृत्व और मूल्यों की महत्वपूर्ण सीख मिलती है। आज के युवाओं के लिए संविधान को जानना और समझना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के प्रभारी एवं दृश्य कला विभाग के संयोजक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रदेशभर में इस प्रकार के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा वर्ग संविधान के प्रति जागरूक हो सके। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सजिता नायर ने किया।
इस अवसर पर संस्कार भारती जयपुर प्रांत अध्यक्ष डॉ. मधु तैलंग भट्ट, प्रांत सह महामंत्री महावीर भारती, मातृ शक्ति संयोजिका सीमा दया, जयपुर महानगर महामंत्री महावीर सेन, कोषाध्यक्ष मदन सिंह चौहान, जितेंद्र शर्मा, चित्रकला विभाग अध्यक्ष लालचंद कांवलिया सहित संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



