विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम के विरोध में जयपुर में नागरिक संगठनों की रैली. शहीद स्मारक पर जोरदार प्रदर्शन, कानून वापस लेने की मांग

 



जयपुर।

विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम–2025 के कथित संविधान विरोधी, दमनकारी तथा नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले प्रावधानों के विरोध में सोमवार को राजधानी जयपुर में नागरिक संगठनों द्वारा भव्य रैली और विरोध प्रदर्शन किया गया। इस जन-आंदोलन में एक दर्जन से अधिक सामाजिक, धार्मिक, मानवाधिकार एवं नागरिक संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

संयुक्त सामाजिक मंच के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा एवं महिलाएं शामिल हुईं। जन-आंदोलन रैली शहीद स्मारक से प्रारंभ होकर एमआई रोड, जीपीओ चौराहा, जालूपुरा, संसार चंद्र रोड से होते हुए पुनः शहीद स्मारक पहुंची।

रैली में शामिल प्रदर्शनकारी

“धर्म पर पाबंदी नहीं चलेगी”, “आजादी की हत्या नहीं सहेंगे”, “संविधान का है यही कहना, सबको मिले धर्म चुनने का गहना”, “काला कानून वापस लो”, “धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करो”

जैसे नारों की तख्तियां थामे हुए चल रहे थे।


शहीद स्मारक पर आयोजित जनसभा को विभिन्न संगठनों के प्रमुख वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने इस अधिनियम को संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ बताते हुए इसके विरुद्ध एकजुट संघर्ष का आह्वान किया। सभा के पश्चात राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।


वक्ताओं ने कहा— धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा आघात

सभा को संबोधित करते हुए आदिवासी विकास परिषद एवं जनमोर्चा राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष के. सी. घुमरिया ने कहा कि यह अधिनियम आदिवासी, वंचित और हाशिए पर खड़े समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। संविधान हर नागरिक को अपनी आस्था चुनने की स्वतंत्रता देता है, जिसे यह कानून सीमित करने का प्रयास करता है।

जनमोर्चा राजस्थान के महासचिव हाफिज़ मंज़ूर अली खान ने कहा कि यह कानून समाज में भय, अविश्वास और संदेह का वातावरण पैदा करेगा।

राजस्थान मदरसा बोर्ड के चेयरमैन एम. डी. चौपदार ने कहा कि धर्म परिवर्तन को अपराध के रूप में परिभाषित करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है।

किशनपोल विधायक अमीन कागजी ने कहा कि यह विधेयक नागरिकों के निजी जीवन और व्यक्तिगत निर्णयों में अनुचित हस्तक्षेप करता है।

यूथ बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं धर्म स्वतंत्रता संविधान रक्षा संघर्ष समिति के संयोजक डॉ. नरेन्द्र बौद्ध ने कहा कि यह कानून समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करता है।



क्रिश्चियन मरु भूमि समिति के अध्यक्ष बलवंत सिंह ने कहा कि यह अधिनियम अल्पसंख्यक समुदायों को संदेह की दृष्टि से देखने की मानसिकता को बढ़ावा देता है।


दलित मुस्लिम एकता मंच के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ आरको ने कहा कि यह कानून दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को डराने का माध्यम बन सकता है।

आंबेडकराइट पार्टी ऑफ इंडिया, राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष एवं धर्म स्वतंत्रता संविधान रक्षा संघर्ष समिति के संयोजक डॉ. दशरथ कुमार हिनूनिया ने कहा कि यह अधिनियम डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान की आत्मा के खिलाफ है।

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