संस्कृति के माध्यम से राष्ट्र सेवा: राहिस भारती और धोड द्वारा विश्व मंच पर भारत की आत्मा का उद्घोष



कोपेनहेगन, डेनमार्क

भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है—यह कथन तब साकार होता दिखाई दिया, जब डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में राजस्थान की लोक धुनों, पारंपरिक वाद्यों और भारत माता के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की गूंज सुनाई दी। अवसर था वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ और उत्तर प्रदेश दिवस का, जिसे भारतीय दूतावास, कोपेनहेगन द्वारा डेनमार्क में बसे भारतीय समुदाय के सहयोग से भव्य रूप में मनाया गया।

इस ऐतिहासिक और भावनात्मक अवसर पर भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रस्तुत करने का दायित्व सौंपा गया राजस्थान के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त लोक कलाकार राहिस भारती एवं उनके विश्वविख्यात सांस्कृतिक समूह धोड – जिप्सीज़ ऑफ राजस्थान को। यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर, सांस्कृतिक कूटनीति और राष्ट्र सेवा का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी।



दूतावास का सांस्कृतिक संदेश: कला के माध्यम से भारत की पहचान

कार्यक्रम का आयोजन भारतीय दूतावास, कोपेनहेगन द्वारा किया गया, जिसमें डेनमार्क में भारत के राजदूत महामहिम श्री मनीष प्रभात की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजदूत ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है, जो आज भी विश्व को शांति, सह-अस्तित्व और विविधता में एकता का संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि राहिस भारती और धोड जैसे कलाकार भारत की उस आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो गांवों की मिट्टी से निकलकर विश्व के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचती है। यह कार्यक्रम भारत और डेनमार्क के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

वंदे मातरम्: राष्ट्र भावना का प्रतीक

वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। इसकी 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या भावनाओं से ओत-प्रोत रही। जैसे ही राजस्थान की लोक धुनों के साथ वंदे मातरम् की भावना मंच से प्रवाहित हुई, वहां मौजूद भारतीय समुदाय के साथ-साथ विदेशी दर्शकों ने भी भारत की सांस्कृतिक शक्ति को अनुभव किया।

यह कार्यक्रम इस बात का सशक्त प्रमाण बना कि भारत अपनी संस्कृति के माध्यम से विश्व से संवाद करता है—बिना किसी सीमा, भाषा या भूगोल के बंधन के।

राहिस भारती: संस्कृति को जीवन का मिशन बनाने वाला नाम

राहिस भारती पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारतीय लोक संस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित कर रहे हैं। उन्होंने कला को केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित न रखकर इसे राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाया है। इसी समर्पण के चलते उन्हें राजस्थान का सांस्कृतिक राजदूत भी घोषित किया गया।



अब तक राहिस भारती 119 से अधिक देशों में हजारों अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां दे चुके हैं। यूरोप, अमेरिका, एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया—हर महाद्वीप में उन्होंने भारत की लोक संस्कृति का परचम लहराया है। उनके कार्यक्रमों में केवल संगीत और नृत्य नहीं होता, बल्कि भारत की आत्मा, परंपरा और दर्शन की झलक मिलती है।

धोड – जिप्सीज़ ऑफ राजस्थान: लोक परंपरा का जीवंत स्वरूप

धोड – जिप्सीज़ ऑफ राजस्थान एक ऐसा सांस्कृतिक समूह है, जो राजस्थान के गांवों से आए प्रामाणिक लोक कलाकारों से सुसज्जित है। इसमें पारंपरिक गायक, वादक और नर्तक शामिल हैं, जो पीढ़ियों से चली आ रही लोक कलाओं के संवाहक हैं।






कमायचा, ढोलक, खड़ताल, मुरलिया, सारंगी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और कालबेलिया, घूमर, भवाई जैसे लोक नृत्यों की प्रस्तुति ने कोपेनहेगन में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ राजस्थान की संस्कृति का स्वागत किया।

धोड की विशेषता यह है कि यह समूह लोक कला को उसके शुद्ध और मौलिक रूप में प्रस्तुत करता है, बिना किसी कृत्रिम बदलाव के। यही कारण है कि इसे विश्व भर में प्रामाणिक भारतीय लोक संस्कृति का प्रतिनिधि माना जाता है।

वैश्विक मंचों पर भारत का गौरव

राहिस भारती और धोड ने इससे पूर्व भी कई ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इनमें प्रमुख हैं—

ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय का डायमंड जुबिली समारोह (लंदन)

फॉर्मूला-1 सिंगापुर ग्रैंड प्री

वोमाड (WOMAD) फेस्टिवल, यूनाइटेड किंगडम

पेरिस में आयोजित ‘नमस्ते फ्रांस’ का उद्घाटन समारोह, जहां भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति रही

इसके अतिरिक्त फ्रांस के प्रतिष्ठित ला सीन म्यूज़िकल में प्रस्तुति और फ्रांस के राष्ट्रपति के समक्ष कार्यक्रम ने धोड की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया।



प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित सांस्कृतिक यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “भारत की सांस्कृतिक जड़ों को विश्व से जोड़ने” के विजन से प्रेरित होकर राहिस भारती निरंतर भारतीय लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिला रहे हैं।

उनका मानना है कि भारत की असली ताकत उसके गांवों में बसती है। इसी सोच के साथ उन्होंने धोड के माध्यम से राजस्थान के सैकड़ों लोक कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच, सम्मान और आजीविका प्रदान की है। इससे न केवल कलाकारों का जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि विलुप्त होती लोक कलाओं को भी नया जीवन मिला है।

विश्व संगीत श्रृंखला में भारत का प्रतिनिधित्व

धोड को बेल्जियम सरकार की ‘वर्ल्ड म्यूज़िक सीरीज़’ के अंतर्गत भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। इस परियोजना के तहत समूह ने बेल्जियम के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक केंद्रों में प्रस्तुतियां दीं।

इन प्रस्तुतियों में ओपेरा डी लीज़ जैसे प्रतिष्ठित मंच भी शामिल रहे। इसके बाद धोड ने फ्रांस और पुर्तगाल में भी सफल प्रस्तुतियां देकर भारत की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूत किया।

भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी

कोपेनहेगन में आयोजित इस कार्यक्रम में डेनमार्क में रह रहे भारतीय समुदाय की सक्रिय और भावनात्मक भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान प्रवासी भारतीयों ने इसे अपने देश से भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बताया।

भारतीय परंपरागत परिधान, तिरंगे की उपस्थिति और राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान ने पूरे वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।


संस्कृति: भारत की सॉफ्ट पावर

आज के वैश्विक परिदृश्य में संस्कृति भारत की सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर बनकर उभरी है। राहिस भारती और धोड जैसे कलाकार इस सॉफ्ट पावर के सशक्त वाहक हैं, जो बिना किसी राजनीतिक या कूटनीतिक भाषा के भारत का संदेश विश्व तक पहुंचाते हैं।

राजस्थान की लोक धुनों के माध्यम से भारत की सहिष्णुता, विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का संदेश जब विदेशी दर्शकों तक पहुंचता है, तो वह भारत के प्रति सम्मान और आकर्षण को और गहरा करता है।

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ: सांस्कृतिक चेतना का उत्सव

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव बन गया। इस अवसर पर राजस्थान की लोक संस्कृति ने यह सिद्ध किया कि भारत की परंपराएं समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होती जा रही हैं।

निष्कर्ष: भारत की आत्मा का विश्व से संवाद

कोपेनहेगन में गूंजती राजस्थान की लोक धुनें और वंदे मातरम् की भावना यह संदेश देती है कि भारत अपनी संस्कृति के माध्यम से विश्व से संवाद करता है। राहिस भारती और धोड आज केवल कलाकार नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक राजदूत हैं, जो राष्ट्र की आत्मा, परंपरा और गौरव को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचा रहे हैं।

यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है कि कैसे संस्कृति को सहेजते हुए उसे विश्व पटल पर गर्व के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है—यही सच्ची राष्ट्र सेवा है।


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